एक खेत में 4 अलग-अलग फसलें उगाई जा सकती हैं, बहुस्तरीय खेती से किसान हो रहे समृद्ध

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बहु-स्तरीय खेती : आज के दौर में किसान परंपरागत खेती के बजाय आधुनिक तरीके से फसलों की खेती कर रहे हैं, जिसमें कम श्रम और समय की आवश्यकता होती है और अधिक मुनाफा होता है। ऐसे में आज किसान बहुस्तरीय खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जिसके तहत एक ही खेत में 3 से 4 अलग-अलग फसलें उगाई जा सकती हैं।

बहुस्तरीय खेती से किसानों को बहुत लाभ होता है, क्योंकि इससे कम जमीन में अधिक फसलें उगाई जा सकती हैं। हालांकि, इस तकनीक से रोपण करते समय फसलों का चयन सावधानी से करना होता है, खेत के किनारे फलों के पेड़ या छायादार पेड़ लगाकर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

बहुपरत खेती के लाभ | बहुस्तरीय खेती के लाभ

बहुस्तरीय खेती के कई फायदे हैं, जिसमें किसानों को लंबे समय तक खेतों में काम नहीं करना पड़ता है। इसके अलावा इस तकनीक से खेती में 70 प्रतिशत तक पानी की बचत की जा सकती है, क्योंकि खेत में खुली जगह नहीं होती है और इसलिए खरपतवार भी नहीं होते हैं। यह भी पढ़ें- ताइवान की लाल भिंडी पपीता लगाकर अमीर बन रही है यह महिला किसान, प्रति पेड़ 1 क्विंटल फल लगाएगी

इसके अलावा बेहतर फसल पैदा करने के लिए खेत में कम खाद डाली जाती है, क्योंकि एक ही समय में 3 से 4 फसलें उगाई जाती हैं, जिससे खेत में कोई खाली जमीन नहीं रह जाती है। बहुस्तरीय खेती से किसानों का समय भी बचता है, क्योंकि खेत को बार-बार जोतने की जरूरत नहीं पड़ती।

बहुस्तरीय खेती के तहत किसान पुदीना, धनिया और मिर्च जैसी छोटी फसलों को लाभदायक बनाने के अलावा फल, सब्जियां और दालों की खेती कर सकता है। खेत के किनारे विभिन्न फलों के पेड़ लगाए जा सकते हैं, जो फसलों को धूप से बचाते हैं और अच्छा फल उत्पादन भी प्रदान करते हैं।

इस तरह बहुस्तरीय खेती से किसान को समय, पैसा, पानी और खाद समेत कई चीजों की बचत होती है, ऐसे में एक किसान को एक एकड़ में खेती करने के लिए सिर्फ 1 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। वहीं इस तकनीक से किसान आसानी से 5 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं, जिससे बहुस्तरीय खेती बेहतर मानी जाती है। यह भी पढ़ें- अफीम उगाकर अमीर हो रहे हैं किसान, लागत से कई गुना ज्यादा कमा रहे हैं


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